"स्वागत है जुमलेबाज़ी के
Digital Museum में।"
ऐसे राजनीतिक बयान जिन्हें दोबारा जांचने की जरूरत है। भाषण में क्या कहा गया था, सरकारी रिकॉर्ड क्या कहता है और प्राथमिक स्रोतों में क्या दर्ज है।
"विदेशी बैंकों से सारा काला धन वापस लाएंगे, तो हर गरीब और नागरिक के खाते में 15-15 लाख रुपये मुफ्त आ जाएंगे।"
"हमारी सरकार आएगी तो हम देश के नौजवानों के लिए हर वर्ष 2 करोड़ नए रोजगार पैदा करेंगे।"
"2022 में जब देश आजादी के 75 साल मनाएगा, तब तक हमारे देश के किसानों की आमदनी दोगुनी हो जाएगी।"
"हम देश में 100 स्मार्ट सिटी बनाएंगे जो विश्वस्तरीय आधुनिक बुनियादी ढांचे, डिजिटल कनेक्टिविटी और 24 घंटे सुविधाओं से लैस होंगे।"
"ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा — भ्रष्टाचार और काले धन पर हमारी सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति है।"
"कच्चा तेल सस्ता होगा तो जनता को पेट्रोल ₹30-35 प्रति लीटर मिलेगा... क्या आपको कम दाम में पेट्रोल चाहिए कि नहीं?"
बाल लिंगानुपात में सुधार, बेटियों की उच्च शिक्षा सुनिश्चित करना, कन्या भ्रूण हत्या रोकना और महिलाओं के खिलाफ हिंसा पर पूर्ण विराम।
महिला सशक्तिकरण पर संसद की स्थायी समिति (दिसंबर 2021) की आधिकारिक रिपोर्ट में सनसनीखेज खुलासा हुआ कि योजना के कुल आवंटित बजट का लगभग 78.9% हिस्सा केवल टीवी विज्ञापनों, अखबारों के होर्डिंग्स और मीडिया प्रचार पर खर्च हुआ। दूसरी तरफ, हाथरस, उन्नाव, अंकिता भंडारी हत्याकांड और जंतर-मंतर पर महिला पहलवानों के यौन शोषण के आरोपों पर सत्ता के संरक्षण को लेकर देश भर में भारी आक्रोश रहा।
अभियान को विज्ञापनों में चमकाया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर महिला थानों, सीसीटीवी, फॉरेंसिक लैब और महिला छात्रावासों के बजट की भारी कमी बनी रही।
महंगाई से पूर्ण मुक्ति, सस्ता पेट्रोल-डीजल, 2 करोड़ नौकरियों का सृजन, मजबूत रुपया और आम नागरिक के जीवन स्तर में तीव्र सुधार।
अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दाम $110 से गिरकर $38 पर आ गए, लेकिन जनता को राहत देने के बजाय केंद्र सरकार ने उत्पाद शुल्क 200% से 800% तक बढ़ाकर जनता की जेब से ₹26 लाख करोड़ से अधिक का टैक्स वसूला। एलपीजी सिलेंडर ₹410 से बढ़कर ₹1,100 के पार पहुंच गया, खाद्य महंगाई दर 8% से ऊपर रही और डॉलर के मुकाबले रुपया 58 से गिरकर 83 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर चला गया।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक सम्मेलन में स्वीकार किया कि यह नारा चुनाव जीतने के लिए उछाला गया था जो बाद में सरकार के गले की हड्डी बन गया।
भ्रष्टाचार के विरुद्ध शून्य सहनशीलता, बिचौलियों का अंत, दागी नेताओं पर सख्त कार्रवाई और राजनीतिक चंदे में पूर्ण शुचिता।
सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने 2024 में 'चुनावी बॉन्ड योजना' को असंवैधानिक घोषित किया, जिसके तहत घाटे में चल रही और छापों का सामना कर रही कंपनियों से करोड़ों का गुप्त चंदा लिया गया। कैग (CAG) की रिपोर्ट ने द्वारका एक्सप्रेसवे में ₹18 करोड़/किमी की जगह ₹250 करोड़/किमी खर्च और आयुष्मान योजना में बड़े फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ किया। 25 बड़े दागी नेताओं के भाजपा में आते ही 23 के भ्रष्टाचार मामले बंद कर दिए गए।
निचले स्तर पर कागजी रिश्वत भले कम हुई, लेकिन कॉर्पोरेट चंदे और ईडी/सीबीआई के राजनीतिक इस्तेमाल ने 'वाशिंग मशीन राजनीति' को जन्म दिया।
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जनता 10 साल से पासबुक में एंट्री चेक कर रही है—₹15 भी नहीं आए! 2 करोड़ नौकरियों के नाम पर देश को 45 साल की सबसे भयानक बेरोजगारी और 4 साल वाली बिना पेंशन की 'अग्निवीर' थमा दी।
₹2.5 लाख करोड़ फूंकने के बाद भी स्मार्ट सिटी का मतलब सिर्फ चौराहों पर लगे कैमरे और LED स्क्रीन निकले, पहली ही बारिश में शहर पानी में डूब जाते हैं। और गंगा में अरबों रुपये बहाने के बाद भी पानी आचमन लायक तक नहीं बचा।
रात 8 बजे 86% नोट रद्द करके सवा सौ करोड़ लोगों को एटीएम की लाइनों में लगा दिया, 100+ बेकसूर मर गए। अंत में RBI ने बताया 99.3% नोट वापस बैंकों में आ गए (काला धन शून्य)। आज 10 साल बाद भी देश उस चौराहे को ढूंढ रहा है!
कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय दाम गिरते रहे, पर भारत में पेट्रोल ₹100 पार शतक लगा गया, डीजल ₹90 हो गया और ₹400 वाला गैस सिलेंडर ₹1100 पार पहुंच गया। वहीं रुपया इतिहास के सबसे निचले स्तर ₹87 प्रति डॉलर पर आईसीयू में पहुंच गया!
आईआईटी, आईआईएम और लाखों डिग्रीधारी बेरोजगार युवाओं को देश के प्रधानमंत्री ने नाली से गैस चुराने और सड़क किनारे पकोड़े तलने का नया आधुनिक इकोनॉमिक मॉडल समझाया!
डिफेंस साइंस को हिलाते हुए दावा किया कि रडार बादलों के पार नहीं देख सकता। वहीं ₹1.1 लाख करोड़ की बुलेट ट्रेन 2022 में चलनी थी, 2026 आ गया और 50 किमी का ट्रैक भी पूरा नहीं हुआ, बस हर साल 3D एनिमेशन वीडियो चल रहा है!
4 घंटे के नोटिस पर क्रूर लॉकडाउन लगाकर करोड़ों मजदूरों को तपती धूप में पैदल चलने पर छोड़ दिया। अस्पतालों में ऑक्सीजन और बेड की जगह थाली बजवाई, लाखों लाशें गंगा में तैर गईं, पर संसद में बोल दिया—'नो डेटा अवेलेबल'!
आमदनी दोगुनी नहीं हुई, खाद-डीजल का खर्च दोगुना हो गया। जबरन कानून थोपे, 370 दिन तक किसानों ने कील-कांटे और लाठियां झेलीं, 700+ किसान शहीद हुए। फिर चुनाव हारने के डर से टीवी पर हाथ जोड़कर बोले—"शायद मेरी तपस्या में ही कोई कमी रह गई थी!"
10 साल की बेरोजगारी और महंगाई का हिसाब देने के बजाय खुद को भगवान का सीधा अवतार बता दिया! उधर सुप्रीम कोर्ट ने इनके ₹16,500 करोड़ के गुप्त 'इलेक्टोरल बॉन्ड' को असंवैधानिक घोषित कर दुनिया का सबसे बड़ा 'ईडी-सीबीआई भेजो, चंदा लो और ठेका दो' का हफ्ता-वसूली रैकेट साबित कर दिया!
जब 2022 की सभी डेडलाइन फुस्स हो गईं, तो बिना किसी जवाबदेही के नया गोलपोस्ट सीधे 2047 (अगले 20 साल) पर खिसका दिया—ताकि आज कोई रिपोर्ट कार्ड न मांग सके और जुमलों की दुकान बदस्तूर चलती रहे!